वाराणसी संसदीय सीट से पीडीएम से उम्मीदवार हो सकती हैं अपना दल के नेता पल्लवी पटेल

By ADARSH UMRAO

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पल्लवी पटेल

पीडीएम (पिछड़ा, दलित और मुसलमान) न्याय मोर्चा से बनारस संसदीय सीट से यदि पल्लवी पटेल चुनाव लड़ती हैं तो मोदी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। जीत या हार किसकी होगी, यह तो समय बताएगा। लेकिन अभी जो दिख रहा है, उसके अनुसार अपना दल (के) की ये नेता मोदी के 2019 के मुकाबले और ज्यादा मतों से जीतने के मंसूबे पर पलीता लगा सकती हैं।

वाराणसी संसदीय क्षेत्र में सेवापुरी तथा रोहनिया विधानसभा में कुर्मी मतदाताओं की संख्या कमोबेश डेढ़-डेढ़ लाख के आसपास है। इन दोनों विधानसभाओं में डॉ. सोनेलाल पटेल के समय से अपना दल का प्रभाव अच्छा रहा है। पार्टी में दो फाड़ होने के बाद राजनैतिक प्रतिबद्धता के मामले में कुर्मी जाति में भी विभाजन हुआ। ज्यादातर कुर्मी अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल सोनेलाल के साथ हैं, लेकिन इनकी मां कृष्णा पटेल और बड़ा बहन पल्लवी पटेल के भी समर्थक कम नहीं हैं।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रोहनिया तथा सेवापुरी विधानसभा के कुर्मी अपना दल एस और अपना दल कमेरावादी में ही बंटे हुए हैं। भाजपा के समर्थक न कभी रहे, न आज हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और अपना दल कमेरावादी के गठबंधन के उम्मीदवार अभय पटेल को 72 हजार 191 मत मिले थे। एक लाख 18 हजार 663 वोट पाकर अपना दल एस के प्रत्याशी डॉ. सुनील पटेल जीते थे। कांग्रेस के राजेश्वर पटेल को भी 16 हजार 785 मत मिले थे।

पल्लवी पटेल

रही बात सेवापुरी की तो यहां 2022 में यहां से भारतीय जनता पार्टी के नीलरतन सिंह पटेल ने एक लाख 5 हजार 163 मत पाकर जीत दर्ज की थी। समाजवादी पार्टी के सुरेंद्र सिंह पटेल को 82 हजार 632 वोट मिले थे।

इन दोनों विधानसभाओं के कुर्मी मतदाता बहुतायत में अपना दल के समर्थक हैं। कोई अपना दल सोनेलाल के साथ है तो कोई अपना दल कमेरावादी। हां, इसमें दो राय नहीं है कि अपना दल सोनेलाल के समर्थक कुर्मियों की संख्या ज्यादा है। लेकिन वे अपना दल के समर्थक हैं, भारतीय जनता पार्टी के नहीं। सेवापुरी से 2022 के विधानसभा चुनाव में नीलरतन सिंह पटेल की जीत इसीलिए लिए हुई कि वे कुर्मी हैं, और 2017 के चुनाव में वे अपना दल सोनेलाल के टिकट पर चुनाव जीते थे।

ADARSH UMRAO

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