मतदान अधिक से अधिक हो इसके लिए बनाया गया माहौल

By ADARSH UMRAO

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chandrika dixit

लोकसभा चुनाव में सतप्रतिशत मतदान के लिए सामाजिक धार्मिक एवं शैक्षिक संस्थानों से जनमानस के बीच में मतदान अधिक से अधिक हो इसके लिए बनाया गया माहौल

जिस तरह से देश में धार्मिक और आध्यात्मिक त्योहार मनाए जाते हैं जैसे लोग होली दशहरा दीपावली एवं नवरात्रि के पावन पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मानते हैं ठीक इसी तरह जब हर मानव के दिलों दिमाग में यह भावना आ जाएगी की यह मतदान का भी पर्व भी हम लोगों के लिए किन्ही धार्मिक अवसरों से काम नहीं है ऐसी भावनाएं हर मनुष्य को अपने मन में लानी होगी ना कि जिस तरह से आज देश में जब भी मतदान होता है तो मनुष्य के अंदर एक ऐसी भावना उत्पन्न होती है की एक वोट से क्या फर्क पड़ने वाला है जबकि यह सोचना होगा कि एक वोट से ही अटल बिहारी वाजपेई की सरकार गिर गई थी और जब लोकसभा और विधानसभा के परिणाम घोषित होते हैं तो प्राय बहुत सी जगह पर यह देखने को मिलता है कि एक और एक वोट से हार जीत हो गई है इस वजह से एक वोट का बहुत महत्व है

उपजा के प्रांतीय मंत्री एवम्व रिष्ठ पत्रकार चंद्रिका दीक्षित ने सामाजिक संगठनों आध्यात्मिक संगठनों शैक्षिक संगठनों से जुड़े लोगों का आवाहन करते हुए कहा है कि हमारी सबसे बड़ी सेवा यह है कि लोग सत प्रतिशत मतदान करें इसके लिए हम लोगों के बीच में जाएं और उन्हें इस बात को समझाएं कि जिस तरह से लोग गंगा स्नान करने किसी धार्मिक स्थल में जाकर दान आदि करते हैं ठीक उसी तरह हमारा मतदान भी है जिस तरह लोग बेटी की शादी में कन्यादान को महत्व देते हैं इस तरह से मतदान को भी महत्व देना चाहिए क्योंकि इस मतदान से देश का निर्माण होता है प्रदेश का निर्माण होता है गांव का निर्माण होता है इससे हम मतदान करके देश को सशक्त नेतृत्व प्रदान करने में हमारा वोट ही महत्वपूर्ण होता है और लोकतंत्र में मनुष्य को केवल एक वोट का ही अधिकार ऐसा दिया गया है जिसके कारण भले ही पांच साल में हमारे पास कोई आता हो यह वोट  की ताकत ऐसी है जिसके लिए ऊंचे स्तर पर बैठा नेतृत्व करने वाला नेता हमारे पास वोटो की भीख मांगने आता है हमें यह सूचना चाहिए कि हमारा यह पर्व पांच वर्ष में आया है तो हमें हर्षोल्लास के साथ मना कर मतदान के दिन लाइन में लगकर हमें मतदान करना चाहिए तभी इस देश को सही नेतृत्व मिलेगा और देश का विकास होगा और अखंड भारत का सपना साकार होगा

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उन्होंने कहा कि जिस तरह से हर वर्ष मानव दीपावली होली दशहरा नवरात्रि के पावन पर्व हर वर्ष मनाते हैं इन त्योहारों का इंतजार हम वर्ष भर करते हैं और जब यह त्यौहार आते हैं तो सारे आपसी राग द्वेष भेदभाव मिटाकर इन त्योहारों को बड़े खुशियों के साथ मनाते हैं ठीक उसी तरह यह मतदान का पर भर 5 वर्ष में आता है इतने लंबे अंतराल में तमाम खट्टे मीठे अनुभव हमें इन राजनेताओं द्वारा मिलते हैं किंतु हमें यह सब भूलकर मतदान का पर्व भी खुशियों और हर्षोल्लास के साथ सभी भेदभाव को मिटाकर सिर्फ हमें यह देखना चाहिए कि चुनाव के मैदान में विभिन्न राजनीतिक दलों की पार्टीयां चुनाव मैदान में है उसमें हमें यह देखना है की कौन सा ऐसा क्षेत्रीय प्रतिनिधि और कौन सा ऐसा राष्ट्रीय नेता जो इस हमारे लोकतंत्र को मजबूत करने में सहायक होगा और हमारे देश की एकता और अखंडता को बरकार रखने में कर्मठता से पूरा योगदान करेगा इसकी अच्छी से जांच परख करके ऐसे नेता और ऐसी पार्टी को ही मतदान करना चाहिए यही हमारे राष्ट्रीयता का परिचायक होता है और हमें जिस तरह से धार्मिक अनुष्ठानों के लिए दान करने की परंपरा होती है ठीक उसी तरह की परंपराओं में मतदान की भी परंपरा हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग है
श्री दीक्षित ने कहा कि हमारे देश की महिलाएं भी रानी लक्ष्मीबाई किसी दुर्गा और चंडी से काम नहीं है और वह भीषण गर्मी के दिनों में वटवृक्ष की पूजा का व्रत रखती हैं और इसी माह में भीम एकादशी का भी व्रत रखती हैं इसके अलावा करवा चौथ तीजा का व्रत आदि साल भर तमाम ऐसे व्रत करती हैं जो बहुत ही कठिनाई के होते हैं और वह अपने पतियों के सुहाग और बाल बच्चों की सलामती के लिए ईश्वर से आशीर्वाद मांगती हैं ठीक इसी तरह हमारे देश का जब नेतृत्व सही होगा तभी मानव समाज में समरसता आएगी और आपके द्वारा किए गए व्रत का भी सही लाभ हमारे शासन प्रशासन के द्वारा मिलेगा ऐसी भावना भी रखनी चाहिए और इस मतदान को भी अपने उन्हें व्रत की श्रृंखला में जोड़ लेना चाहिए और महिलाओं को आगे आकर अपने घर के सभी मतदाताओं को सुबह से ही मतदान केंद्र पर जाकर वोट डालने के लिए प्रेरित करना चाहिए तभी हमारे देश का आध्यात्मिक विकास सामाजिक विकास एवं राष्ट्रीय विकास संभव हो सकेगा

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उन्होंनेदेश के देश के कथा वाचकों अर्चक पुरोहितों साधु संतों से भी कहां है कि इस पावन पुनीत पर्व में इनका भी अहम योगदान होना चाहिए क्योंकि जिसे हम लोग जनमानस के बीच में तमाम माध्यमों से अधिक से अधिक मतदान करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करते हैं ठीक उसी तरह से कथा के माध्यम या साधु संतों को अपने उपदेशों को माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक मतदान करने के लिए प्रेरित करना चाहिए ताकि हमारे देश में सत्य प्रतिशत मतदान हो सके उन्होंने सभी का वहन किया है कि जिस तरह से वर्ष भर में होने वाले त्योहारों को आप अपने जीवन में हर्षोल्लास के साथ मानते हैं ठीक उसी तरह से मतदान पर्व को भी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई और अधिक से अधिक मतदान करके इस देश की तकदीर को बदलने का काम हमारे देश के मतदाता करें

ADARSH UMRAO

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