रेलवे स्टेशन पर समुद्र तल से ऊंचाई लिखने के कई कारण हैं

समुद्र तल से ऊंचाई जानने से, लोको पायलट और गार्ड को यह पता चल जाता है कि वे कितनी ऊंचाई पर हैं और उन्हें अपनी ट्रेन की गति को उसी के अनुसार समायोजित करना होगा।

ऊंचाई बढ़ने के साथ हवा का घनत्व कम होता जाता है, जिससे ट्रेन की गति में कमी आ सकती है।

ढलान वाली जगहों पर ट्रेन को धीमी गति से चलाना पड़ता है, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

समुद्र तल से ऊंचाई जानने से, लोको पायलट और गार्ड को यह पता चल जाता है कि ट्रैक कितना ढलान वाला है और उन्हें अपनी ट्रेन को चलाने के लिए कितनी सावधानी बरतनी होगी।

 समुद्र तल से ऊंचाई जानने से, रेलवे अधिकारियों को यह पता चल जाता है कि किन स्थानों पर ट्रेन को धीमी गति से चलाना होगा और किन स्थानों पर अधिक गति से चलाया जा सकता है।

समुद्र तल से ऊंचाई जानने से, रेलवे अधिकारियों को ट्रेनों के समय सारणी को बनाने में मदद मिलती है।

वे यह जान सकते हैं कि किसी विशेष स्थान पर ट्रेन को कितना समय लगेगा और उसी के अनुसार ट्रेन का समय निर्धारित कर सकते हैं।

यह जानकारी उन यात्रियों के लिए उपयोगी हो सकती है जिन्हें ऊंचाई से डर लगता है या जिनके स्वास्थ्य पर ऊंचाई का प्रभाव पड़ सकता है।

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